सेकंड ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा 2016

*अजमेर, सेकंड ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा 2016,परीक्षा कार्यक्रम में बड़ा बदलाव,सभी विषयों के पेपर होंगे ऑनलाइन,जून में आयोजित होगी परीक्षा*

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राजस्थान के प्रमुख साहित्यकार एवं उनकी रचनाएं

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प्रमुख #साहित्यकार #रचनाएं

1. चंदवरदाई = ‘पृथ्वीराज रासौ’

2. शिवदास गाडण (चारण) = ‘अचलदास खींची री वचनिका’

3. सूर्य मिश्रण = ‘वंशभास्कर‘ व ‘वीर सतसई’

4. गिरधर आसिया = ‘सगत रासो’

5. कवि कलोल = ‘ढोला मारू रा दूहा’

6. मुहणोत = ‘नैणसी री ख्यात’ व ‘मारवाड़ रा परगना री विगत’

7. जग्गा खिड़िया = ‘राठौड़ रतनसिंह महेस दासोत री वचनिका’

8. बीठू सूजा =‘राव जैतसी रो छंद’

9. नयनचंद्र सूरी = ‘हमीर महाकाव्य’

10. मंडन = ‘राजवल्लभ’

11. जयानक =  ‘पृथ्वीराज विजय’

12. रणछोड़दास भट्ट =  ‘अमरकाव्य वंशावली’

13. पदमनाभ =  ‘कान्हड़दे प्रबंध’ व ‘हमीरायण’

14. नरपतिनाल्ह = ‘वीसलदेव रासौ’

15. महाकवि माघ = ‘शिशुपाल वध’

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16. भट्ट सदाशिव = ‘राजविनोद’

17. कन्हैयालाल सेठिया =  मींझर, गलगचिया, कूंक, पाताल पीथल तथा रमणिये रा सोरठा

18. विजयदान देथा = बातां री फुलवारी (लोक कथाएं)

19. सीताराम लालस = राजस्थानी शब्दकोश

20. कोमल कोठारी = राजस्थानी लोकगीतों, कथाओं आदि का संकलन (रूपायन संस्था द्वारा)

21. अगरचंद नाहटा = पांडुलिपी संग्रह एवं लघुकथाएं

22. बसीर अहमद मयूख = गालिब की रचनाओं का राजस्थानी अनुवाद

23. मणी मधुकर = भरत मुनी के बाद (उपन्यास), पगफैरो (काव्य)

24. मनोहर वर्मा = आग का गोला सूर्य, एक थी चुहिया दादी, मैं पृथ्वी हूं आदि

25. महेन्द्र भानावत = गेहरो फूल गुलाब रो, देव नारायण रो भारत आदि

26. रामपालसिंह राजपुरोहित = सुंदर नैण सुधा (कहानी संग्रह)

27. मेजर रतन जाँगिड़ = माई ऐड़ा पूत जण (कहानी संग्रह)

28. चेतन स्वामी = किस्तुरी मिरग (कहानी संग्रह)

29. नन्द भारद्वाज = सांम्ही खुलतो मारग (उपन्यास)

30. संतोष मायामोहन = सिमरण (कविता संग्रह)

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31. भरत ओला = जीव री जात (कहानी संग्रह)

32. अब्दुल वाहीद ‘कमल’ = घराणो (उपन्यास)

33. जया प्रकाश पांड्या ‘ज्योतिपुँज’ = कंकू कबंध (नाटक)

34. वासु आचार्य = सीर रो घर (कविता संग्रह)

35. शांति भारद्वाज ‘राकेश’ = उड़ जा रे सुआ (उपन्यास)

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राजस्थान : किले, सम्प्रदाय, संस्कृति

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त्रैलोक्य दीप धाम रणकपुर (पाली)

1. जोधपुर का किला या मेहरानगढ़ -राव जोधा [ 1459 में ]

2. अचलगढ़ का किला माउंट आबू-राणाकुंभा

3. भरतपुर का किला लोहागढ़ – जाटराजा सूरजमल[ 1733 में ]

4. कुंभलगढ़ का किला-राणा कुंभा

5. नाहरगढ़ या सुदर्शनगढ़ [ जयपुर ] काकिला-सवाई जयसिंह

6. जैसलमेर का किला या सोनार काकिला-महारावल जैसलदेव

7. चित्तौड़गढ़ का किला-चित्रांगदमौर्य

8. सिवाना का किला जिला बाड़मेर-पँवार राजा वीर नारायण प्रथम

9. तारागढ़ का किला या गढ़बीठलीया अजयमेरु दुर्ग अजमेर -अजयपाल सिंह चौहान

10. बीकानेर का किला या जूनागढ़-राजा रायसिंह राठौड़

11. गागरोण का किला ( झालावाड़ ) -डोड राजा बीजलदेव[ 12 वीं सदी ]

12. डीग का किला-राजा सूरजमल

13. कोटा का किला-माधोसिंह

14. तारागढ़ बूँदी का किला-हाड़ाराजा बरसिंह[ 14 वीं सदी में ]

15. जयगढ़ का किला( आमेर ) – राजासवाई जयसिंह द्वितीय

16. अकबर का किला या मैग्जीन या दौलत खाना अजमेर-अकबर

17. आमेर का किला- कछवाहा राजाधोलाराय

18. नागौर का किला-पृथ्वीराज चौहान के पिता सोमेश्वर

19. वल्लभ सम्प्रदाय के प्रवर्तक कौन थे?- वल्लभाचार्य

20. जसनाथी संप्रदाय की प्रधान पीठ कहाँ है? -कतियासर

21. निम्बार्काचार्यद्वारा प्रवर्तित निम्बार्क सम्प्रदाय को किस अन्य नामसे जाना जाता है? – हंस सम्प्रदाय से

22. देवी के रतजगे के समय महिलाओ द्वारा गाए जाने वाले गीत या मंत्र क्या कहलाते हैं? – चिरजा

23. अलौकिक शक्ति द्वारा किसी कार्य को करना अथवा करवा देना क्या कहलाता है? – पर्चा देना

24. श्रद्धालु अपने आराध्य लोक देवता की सोने, चाँदी, पीतल, ताँबे आदि धातुओ की बनी छोटी प्रतिकृति गले मे बाँधते है जिसे क्या कहते हैं? – नावा या चौकी

25. लोकमानस में सुगन चिड़ी को किस माता का स्वरूप माना जाता है? – आवड़माता
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26. आवड माता जैसलमेर के किस राजवंश की कुलदेवी थी? – भाटी राजवंश की

27. गलियाकोट, डूंगरपुर में किस मुस्लिमसंत की दरगाह है? – फखरुद्दीन की

28. घुड़ला त्यौहार राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में कब से कब तक मनाया जाता है? – चैत्र कृष्णा अष्टमी से चैत्र शुक्ल तृतीया तक

29. . गलता जयपुर में किस संप्रदाय की पीठ है? – रामानुज संप्रदाय की

30. वैशाख शुक्ल तृतीय को क्या कहते हैं? -आखातीज या अक्षय तृतीया

31. रखड़ी क्या है? – सिर पर पहना जाने वाला आभूषण

32. मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखा जाता है यह किस दिन आती है? – माघ अमावस्या के दिन,

33 मल्लीनाथ का पशु मेला कहाँ लगता है? -तिलवाड़ा, बाड़मेर

34. थेवा कला के लिए कौनसा शहर प्रसिद्ध है? – प्रतापगढ़

35. राज्य के किन जिलों में एक भी नदीनहीं बहती है? – बीकानेर व चुरु

36. राजसमंद जिले का मोलेला गाँव किस कला के लिए प्रसिद्ध है? – टेराकोटा (मिट्टी की मूर्तियां) के लिए

37. ब्लैक पॉटरी के कौनसा नगर प्रसिद्ध है? – कोटा

38. ‘बेलि क्रिसन रुक्मणी री’ पुस्तक के लेखक कौन है? – पृथ्वीराज राठौड़

39. पृथ्वीराज रासौ के लेखक चंद बरदाई किस शासक के राज कवि व सामंत थे? – अजमेर के पृथ्वीराज चौहान क

40. प्रसिद्ध प्रेम कथा ‘ढोला मारु रा दोहा’ के रचनाकार कौन थे? – कल्लोल

41. कुम्भलगढ़ दुर्ग का निर्माण महाराणाकुम्भा ने किस प्रमुख वास्तुकार व शिल्पी की देखरेख कराया था? – मंडन की

42. चित्तौड़गढ़ दुर्ग को राजस्थान का गौरव एवं गढ़ों का सिरमौर कहा जाता है जिसका निर्माण किस मौर्य शासकने कराया था? – चित्रागंद मौर्य ने

43. चीनी मिट्टी के बर्तनों पर नीले रंग स चित्रण की कला क्या कहलाती है? – ब्ल्यू पॉटरी

44. पिछवाई पेंटिंग के लिए कौनसा शहर सर्वाधिक प्रसिद्ध है? – नाथद्वारा

45. ऊन को कूट-कूट कर तथा दबा कर बनाए जाने नमदों के लिए कौनसा शहर प्रसिद्ध है? – टौंक

46. चित्तौड़गढ़ जिले का कौनसा गाँव आजम प्रिंट के लिए प्रसिद्ध है? – आकोला

47. नीले व लाल रंग का सर्वाधिक प्रयोग ‘अजरक प्रिंट’ के लिए कौनसा नगर प्रसिद्ध है? – बाड़मेर

48. भैंसलाना किसके खनन के लिए-प्रसिद्ध है? – काले संगमरमर के लिए

49. राजस्थान में किस जनजाति के लोगों की जनसंख्या सर्वाधिक है? – मीणा

50. पाबूजी राठौड़ व जीन्दराव खींची के मध्य युद्ध कब हुआ? – 1266 ई में
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51. अभिनव भरताचार्य किस शासक को कहा जाता है? – महाराणा कुंभा को

52. किस किले को भटनेर का किला कहा जाता है? – हनुमानगढ़ किले को

53. मारवाड़ में राठौड़ वंश की स्थापना किसने की? – राव सीहा ने

54. राजसमंद जिले के किस गाँव में आहाड़या आयड़ सभ्यता के समकालीन दो टीले प्राप्त हुए हैं? – गिलूण्ड में

55. संत ने जम्भो जी ने किस संप्रदाय की स्थापना की? – विश्नोई

56. भक्त कवयित्री मीरा बाई का जन्मस्थान कहाँ है? – मेड़ता

57. पुष्कर में 19 वीं शताब्दी में बना रंगनाथजी का मंदिर किस शैली में बनाहै? – दक्षिणात्य शैली में

58. देव सोमनाथ मंदिर किस जिले में स्थित है? – डूंगरपुर

59. स्तम्भों का वन किस मन्दिर को कहा जाता हैं – रणकपुर जैन मन्दिर पाली

60. महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक किस किले मे किया गया ? – कुंभलगढ़ दुर्ग ( राज्यतिलक – गोगुन्दा में )
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बांसवाड़ा जिला

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#Banswara
1. महत्वपूर्ण तथ्य👉👉
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• बांसवाड़ा जिले का कुल क्षेत्रफल = 5037 किमी²
• बांसवाड़ा जिले की जनसंख्या (2011) = 17,98,194
• बांसवाड़ा जिले का संभागीय मुख्यालय = उदयपुर

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2. भौगोलिक स्थिति 👉👉
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• बांसवाड़ा राजस्थान के दक्षिणी भाग में स्थित एक शहर है।
• बांसवाड़ा की भौगोलिक स्थिति: 23°33′N 74°27′E / 23.55°N 74.45°E
• यह गुजरात और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों की सीमा के निकट है।
• बासंवाडा जिला राजस्थान के दक्षिणी भाग मे गुजरात/मध्य प्रदेश की सीमा से लगता हुआ जिला है। इसे राजस्थान का चेरापूंजी भी कहा जाता है।
• बांस के वनों की अधिकता के कारण इसका नाम बांसवाड़ा पड़ा।
• बांसवाड़ा के प्रमुख कस्बे कुशलगढ़, परतापुर, बागीदौरा, घाटोल, अरथुना हॆ.

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3. इतिहास👉👉
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• इस क्षेत्र का गठन 1530 में बांसवाड़ा रजवाड़े के रूप में किया गया था और बांसवाड़ा शहर इसकी राजधानी था।
• 1948 में राजस्थान राज्य में विलय होने से पहले यह मूल डूंगरपुर राज्य का एक भाग था।
• जिले का मुख्यालय बांसवाड़ा है और भूतपूर्व बांसवाड़ा रियासत के प्रथम प्रमुख जगमाल द्वारा अथवा भील सरदार बांसिया भील द्वारा बसाया गया बताया जाता है।
• इसे “सौ द्वीपों का नगर” भी कहते हैं क्योंकि यहाँ से होकर बहने वाली माही नदी में अनेकानेक से द्वीप हैं।

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4. कला एवं संस्कृति👉👉
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• बांसवाड़ा में मुख्यतः वागडी भाषा बोली जाती हॆ
• बांसवाड़ा मुख्यतया आदिवासी क्षेत्र में स्थित है
• धार्मिक एवं पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण यह शहर अब राजस्थान के खूबसूरत और मनोहारी शहरों में गिना जाने लगा है।
• मां त्रिपुरा सुंदरी मंदिर शताब्दियों से विशिष्ट शक्ति साधकों का प्रसिद्ध उपासना केन्द्र रहा है। इस शक्तिपीठ पर दूर-दूर से लोग आकर शीष झुकाते है। नवरात्रि पर्व पर इस मंदिर के प्रागण में प्रतिदिन विशेष कार्यक्रम होते है, जिन्हें विशेष समारोह के रूप में मनाया जाता है।

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5. शिक्षा 👉👉
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• यहाँ सुखाड़िया विश्वविद्यालय से संलग्न अनैक महाविद्यालय हैं
• प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा हेतु सरकारी स्कूल ही प्रमुख हैं

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6. खनिज एवं कृषि 👉👉
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• बांसवाड़ा की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि एवं खनन पर आधारित है।
• मार्बल, सोना एवं अन्य खनिज बांसवाड़ा के मुख्य खनिज हैं

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7. प्रमुख स्थल 👉👉
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• राजस्थान में बांसवाड़ा से लगभग 14 किलोमीटर दूर तलवाड़ा ग्राम से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर ऊंची रौल श्रृखलाओं के नीचे सघन हरियाली की गोद में उमराई के छोटे से ग्राम में माताबाढ़ी में प्रतिष्ठित है मां त्रिपुरा सुंदरी।
• शक्तिपुरी, शिवपुरी तथा विष्णुपुरी नामक इन तीन पुरियों में स्थित होने के कारण देवी का नाम त्रिपुरा सुन्दरी पड़ा।
• गुजरात, मालवा और मारवाड़ के शासक त्रिपुरा सुन्दरी के उपासक थे।
• अब्दुल्ला पीर दरगाह निकटस्थ ग्राम भवानपुरा में स्थित है। इस स्थान पर प्रतिवर्ष बोहरा जाति के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित होते हैं।
• माही परियोजना बांध की नहरों में पानी वितरण के लिए शहर के पास निर्मित कागदी पिक-अप-वियर है जो सैलानियों के लिए आकर्षण का मुख्य केन्द्र है।

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8. नदी एवं झीलें 👉👉
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• झीलें: आनंद सागर झील
• नदियाँ : माही नदी

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9. परिवहन और यातायात👉👉
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• बांसवाड़ा पहुँचने के लिए सबसे बेहतर विकल्प सड़क मार्ग है।
• राष्ट्रीय राजमार्ग 8 से निजी वाहन द्वारा भी उदयपुर या अहमदाबाद होते हुए बांसवाड़ा पहुँचा जा सकता है।
• बांसवाड़ा अभी तक रेल मार्ग से जुड़ा हुआ नहीं है, लेकिन बांसवाड़ा-रतलाम रेल लाइन प्रस्तावित है
• निकटतम हवाई अड्डा, उदयपुर एवं अहमदाबाद है ।

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10. उद्योग और व्यापार👉👉
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• जंगल बहूतायत हॆ, लकडी, वनस्पति प्रचुर मात्रा में हॆ
• बांसवाड़ा में खनन एवं कपड़ा उद्योग एक प्रमुख व्यवसाय है

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हनुमानगढ़ जिला

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#Hanumangarh
1. महत्वपूर्ण तथ्य👉👉
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• हनुमानगढ़ जिले का कुल क्षेत्रफल = 12,645 किमी²
• हनुमानगढ़ जिले की जनसंख्या (2011) = 17,79,650
• हनुमानगढ़ जिले का संभागीय मुख्यालय = बीकानेर

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2. भौगोलिक स्थिति 👉👉
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• भौगोलिक स्थिति: 29.58°N 74.32°E
• हनुमानगढ़ नगर, उत्तर राजस्थान, पश्चिमोत्तर भारत, में घग्घर नदी के दाऐं तट पर स्थित है।
• हनुमानगढ़ जिला देश के गर्म इलाकों में आता है। गर्मियों में धूल भरी आंधियां तथा मई जून में लू चलती है
• ज्यादातर इलाका कुछ वर्षों पहले सूखा रेगिस्तान था, परन्तु आजकल करीब- करीब सारे जिले में नहरों से सिंचाई होने लगी है, अतः अब यह राजस्थान के हरे भरे जिलों की श्रेणी में आता है।

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3. इतिहास👉👉
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• प्राचीन काल में यह जगह भटनेर कहलाती थी, क्योंकि यहाँ भाटी राजपूतों का शासन था। जैसलमेर के भाटी राजा भूपत सिंह ने भटनेर का प्राचीन किला सन 295 में बनवाया.
• सन 1805 में बीकानेर के राजा सूरत सिंह ने यह किला भाटियों से जीत लिया था। इसी विजय को आधार मान कर, जो कि मंगलवार को हुई थी, इसका नाम हनुमानगढ़ रखा गया ।
• भटनेर किला उस जमाने का एक मज़बूत किला माना जाता था यहाँ तक कि तैमूर ने अपनी जीवनी तुजुके तैमूर में इसे हिंदुस्तान का सबसे मज़बूत किला लिखा है।
• इसके ऊँचे दालान तथा दरबार तक घोडों के जाने के लिए संकड़े रास्ते बने हुए हैं।
• आज़ादी के बाद से यह भाग श्रीगंगानगर जिले के अर्न्तगत आता था जिसे 12 जुलाई 1994 को अलग जिला बना ।

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4. कला एवं संस्कृति👉👉
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• बागड़ी, राजस्थानी भाषा की एक बोली है यहां बोली जाने वाली मुख्य भाषा है।
• पंजाबी शब्दों और हरियाणवी लहजे होने के कारण इसे खिचड़ी भाषा के रूप में जाना जाता है।
• यह राजस्थानी परंपरा एवं संस्कृति की छाप छोड़ने वाले एक संभाग है ।

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5. शिक्षा 👉👉
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• प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा हेतु सरकारी, स्कूल एवं निजी क्षेत्र की कई अच्छी स्कूल हैं
• शिक्षा संन्त स्वामी केश्वानंन्द हनुमानगढ के ही संगरिया तहसील से थे

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6. खनिज एवं कृषि 👉👉
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• सभी प्रकार की कृषि यहाँ की जाती है
• रबी की मुख्य फसलें हैं -चना, सरसों, गेहूं, अरंड और तारामीरा.
• खरीफ की मुख्य फसलें हैं- नरमा, कपास, ग्वार, मूंग, मोठ, बाजरा और ज्वार.
• घग्घर नदी इलाके की एकमात्र नदी है जबकि इंदिरा गांधी फीडर प्रमुख नहर है। अन्य नहरें हैं भाखरा और गंग कैनाल।

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7. प्रमुख स्थल 👉👉
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• गुरुद्वारा सुखासिंह महताबसिंह- भाई सुखासिंह व भाई महताबसिंह ने गुरुद्वारा हरिमंदर साहब, अमृतसर में मस्सा रंघङ का सिर कलम कर बूढ़ा जोहड़ लौटते समय इस स्थान पर रुक कर आराम किया था .
• भटनेर- हनुमानगढ़ टाउन में स्थित प्राचीन किला.
• गोगामेडी- हिन्दू और मुस्लिम दोनों में समान रूप से मान्य गोगा/जाहर पीर की समाधि, जहाँ पशुओं का मेला भाद्रपद माह में भरता है।
• कालीबंगा- 5000 ईसा पूर्व की सिन्धु घाटी सभ्यता का केंद्र, जहाँ एक साइट-म्यूजियम भी है।
• तलवाङा झील- यहाँ पर पृथ्वीराज चौहान और मुहम्मद गौरी के बीच तराइन का युद्ध लड़ा गया था।
• ‘सिल्लामाता’ मंदिर- माना जाता है कि मंदिर में स्थापित शिला का पत्थर घघ्घर नदी में बह कर आया था

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8. नदी एवं झीलें 👉👉
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• घग्घर नदी इलाके की एकमात्र नदी है
• इंदिरा गांधी फीडर प्रमुख नहर है। अन्य नहरें हैं भाखरा और गंग कैनाल।

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9. परिवहन और यातायात👉👉
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• हनुमानगढ़ रेलमार्ग द्वारा बीकानेर, जोधपुर और गंगानगर से जुड़ा हुआ है।
• यहाँ पर रेल व सड़क द्वारा दो प्रकार के यातायात के साधन उपलब्ध हैं।

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10. उद्योग और व्यापार👉👉
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• हनुमानगढ़ की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि आधारित है ।
• हनुमानगढ़ एक कृषि विपणन केंद्र है, जहाँ हथकरघा पर कपास और ऊन की बुनाई होती है।

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डूँगरपुर जिला

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#Dungarpur
🔷डूँगरपुर जिला🔷
1. महत्वपूर्ण तथ्य👉👉
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• डूँगरपुर जिले का कुल क्षेत्रफल = 3770 किमी²
• डूँगरपुर जिले की जनसंख्या (2011) = 13,88,906
• डूँगरपुर जिले का संभागीय मुख्यालय = उदयपुर
• डूँगरपुर पूर्ण साक्षरता वाला आदिवासी जिला है
• डॉ. नगेन्द्र सिंह (अन्तराष्ट्रीय न्यायालय में न्याधीश) का सम्बन्ध डूँगरपुर से है

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2. भौगोलिक स्थिति 👉👉
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• डूँगरपुर राजस्थान के दक्षिणी भाग में स्थित एक शहर है।
• डूँगरपुर की भौगोलिक स्थिति: 23.84°N 73.72°E

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3. इतिहास👉👉
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• डूंगरपुर की स्थापना 1282 ई. में रावल वीर सिंह ने की थी। उन्होंने यह क्षेत्र भील प्रमुख डुंगरिया को हराकर विजित किया था। इसीलिए इस जगह का नाम ‘डूंगरपुर’ पड़ा।
• वर्ष 1818 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी ने इसे अपने अधिकार में ले लिया था।
• यह जगह डूंगरपुर प्रिंसली स्टेट की राजधानी थी। यहां से होकर बहने वाली सोम और माही नदियां इसे उदयपुर और बंसवाड़ा से अलग करती हैं।
• नेजा नृत्य राजस्थान के डूँगरपुर, उदयपुर, पाली व सिरोही क्षेत्र में  प्रसिद्ध लोक नृत्यों में से एक है। यह नृत्य प्रसिद्ध हिन्दू त्योहार ‘होली’ के तीसरे दिन किया जाता है। इस नृत्य में भील जाति के स्त्री तथा पुरुष भाग लेते हैं।

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4. कला एवं संस्कृति👉👉
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• डूँगरपुर में मुख्यतः वागडी भाषा बोली जाती हॆ
• डूँगरपुर मुख्यतया आदिवासी क्षेत्र में स्थित है
• यहाँ की वास्तुकला अपने आप में बेजोड़ है। डूंगरपुर वास्तुकला की विशेष शैली के लिए जाना जाता है, जो यहां के महलों और अन्य ऐतिहासिक इमारतों में देखी जा सकती है।
• यहां की मूल बोली “वागड़ी” है। जिस पर गुजराती भाषा का प्रभाव दिखाई देता है।
• यहाँ की संस्कृती में औरते और पुरुष एक जैसे ही माने जाते है| लड़के और लडकियों को अपने पसंदीदार व्यक्ति को चुनने की आज़ादी होती है|
• अप्रैल महीने में “भगोरिया” नाम का त्यौहार होता है| इनमे लड़के लडकिया मेले में आते है आते है, इस मेले में वे अपने पसंदीदार व्यक्ति को चुनके शादी की जाती है|
• होली यहाँ सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है, होली के पंधरा दिन पहले ही ढोल बजाये जाते है| होली दे दिन में लड़के-लडकिया नृत्य करते है|

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5. शिक्षा 👉👉
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• यहाँ सुखाड़िया विश्वविद्यालय संलग्न अनैक महाविद्यालय हैं
• प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा हेतु सरकारी स्कूल ही प्रमुख हैं

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6. खनिज एवं कृषि 👉👉
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• डूँगरपुर के आसपास का क्षेत्र अन्य क्षेत्रों की तुलना में समतल और उपजाऊ है, माही डूँगरपुर की प्रमुख नदी है।
• मक्का, गेहूँ और चना डूँगरपुर की प्रमुख फ़सलें हैं।
• यहाँ पर महुआ नाम की शराब बनाई जाती है|
• राजस्थान में सोना मुख्यतया बांसवाड़ा व डूंगरपुर में पाया जाता है
• डूँगरपुर में लोह-अयस्क, सीसा, जस्ता, चांदी और मैंगनीज पाया जाता है।
• सोनाडी भेड़ राजस्थान में बाँसवाड़ा, भीलवाड़ा, डूँगरपुर, उदयपुर और चित्तौड़गढ़ आदि ज़िलों में पाई जाती है। इस भेड़ की मुख्य पहचान यह है कि इसके कान बहुत लम्बे होते हैं।

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7. प्रमुख स्थल 👉👉
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• रास्तापाल, गुरु-शिष्य के बलिदान की मिसाल “कालीबाई” के प्राणोत्सर्ग हेतु प्रसिद्ध है
• मांडो की पाल – फ्लोर्सपार बेनिफिशियेशन संयंत्र
• गलियाकोट : दाउदी बोहरा सम्प्रदाय की गद्दी जहाँ हर वर्ष उर्स भरता है ।
• बानेश्वर मंदिर डूंगरपुर से 60 किमी. दूर है। इस मंदिर में इस क्षेत्र का सबसे प्रसिद्ध और पवित्र शिवलिंग स्थापित है। यह मंदिर सोम और माही नदी के मुहाने पर बना है।
• देव सोमनाथ : शिव का सफेद पत्थरों निर्मित प्रसिद्ध मन्दिर
• गवरी बाई का मन्दिर
• यहाँ के प्रसिद्ध स्थानों में जूना महल, गैब सागर झील आदि हैं।

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8. नदी एवं झीलें 👉👉
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• झीलें: गैब सागर झील
• नदियाँ : सोम, माही नदी

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9. परिवहन और यातायात👉👉
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• डूँगरपुर पहुँचने के लिए सबसे बेहतर विकल्प सड़क मार्ग है।
• नजदीकी रेलवे स्टेशन रतलाम (80 किमी., मध्यप्रदेश में) है जो देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है।
• निकटतम हवाई अड्डा, उदयपुर एवं अहमदाबाद है ।

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10. उद्योग और व्यापार👉👉
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• जंगल बहूतायत हॆ, लकडी, वनस्पति प्रचुर मात्रा में हॆ
• महिला सहकारी मिनी बैंक (देश में प्रथम) की स्थापना डूँगरपुर में की गयी थी ।
• डूँगरपुर में खनन एक प्रमुख व्यवसाय है |

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Sariska Tiger Reserve

Sariska Tiger Reserve is situated only 200 km from Delhi and 107 kms from Jaipur. Although larger than Ranthambor, it is less commercialised and has less tigers but a similar topography. It covers an area of 800 sq km in total, with a core area of approximately 500 sq km. The Northern Aravali Hills dominate the skyline with their mixture of sharp cliffs and long narrow valleys. The area was declared a sanctuary in 1955 and became a National Park in 1979.
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The landscape of Sariska comprises of hills and narrow valleys of the Aravali hill range. The topography of Sariska supports scrub-thorn arid forests, dry deciduous forests, rocks and grasses. The broad range of wildlife here is a wonderful example of ecological adoption and tolerance, for the climate here is variable as well as erratic.

It is located in the contemporary Alwar district and is the legacy of the Maharajas of Alwar. Pavilions and Temples within Sariska are ruins that hint at past riches and glory. The nearby Kankwadi Fort has a long and turbulent history.In morning and evening, wildlife in Sariska heads towards the many water holes, which litter the park, thus providing the guests with their best chance of viewing game. At some of these watering holes it is possible to book hides which are situated in prime spots for wildlife viewing.

The park is home to numerous carnivores includingLeopard, Wild Dog, Jungle Cat, Civets Hyena, Jackal, and Tiger. These feed on species such asSambar, Chital, Nilgai, Chausingha, Wild Boar and Langur. Sariska is also well known for its large population of Rhesus Monkeys, which are found around Talvriksh.

The avian world is also well represented with Peafowl, Grey Partridge, Bush Quail, Sand Grouse,Tree Pie, Golden backed Woodpecker, crested Serpent Eagle and The Great Indian horned Owl.

The park is open almost whole year-round, but for wildlife viewing and your comfort it is best to visit from October to April. Safaris are provided by jeep.

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Tal Chapper Sanctuary

Located on the fringe of the Great Indian Thar Desert is nestled a unique refuge of the most elegant Antelope encountered in India ?The Black buck?. Tal Chapper sanctuary with almost flat tract and interspersed shallow low lying areas has open grassland with scattered Acacia and prosopis trees which give it an appearance of a typical Savanna. The word ?Tal? means plane land. The rain water flows through shallow low lying areas and collect in the small seasonal water ponds.

The Geology of the zone is obscured by the wind blown over-burden. Some small hillocks and exposed rocks of slate and quartzite are found in the western side of the sanctuary. Area between hillocks and the sanctuary constitutes the watershed area of the sanctuary. The whole sanctuary used to be flooded by water during the heavy rains but with salt mining going on in the watershed. Hardly any rain water falling on the hillocks reach the Sanctuary.
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The Tal Chapper sanctuary lies in theSujangarh Tehsil of Churu District, Situated in the North-East part of Rajasthan. It lies on Nokha- Sujangarh state Highway and is situated at a distance of 85 KM from Churu & about 132 Km from Bikaner. The nearest Railway station is Chapper which lies on Degana – Churu – Rewari metre gauge line of Northen Western Railways.

The nearest Airport is Sanganer (Jaipur) which is at a distance of 215 Kms from Chapper.

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First in Rajasthan

First in Rajasthan:

First Assembly President of Rajasthan – Mr. Narottam Lal Joshi

First Lady Chief Minister (CM) of Rajasthan – Smt. Vasundhra Raje

First Chief Justice of Rajasthan High Court – Mr. Kamal Kant Verma

First Governor of Rajasthan – Mr. Gurumukh Nihal singh

First Lady Minister – Smt. Kamla Beniwal

First Rajasthani Honoured with Dr. Shanti Swaroop Bhatnagar Award –  Mr. Govardhan Mehta

First Rajasthani Film – Nijarano

First Lady Pilot of State – Namrata Bhatt