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प्राचीन भारत का इतिहास

Q).01
समुद्रगुप्त के काल का इतिहास जानने का सबसे महत्वपूर्ण साधन हैं ?
a) इलाहाबाद स्तम्भ पर उत्कीर्ण लेख
b) मधुबनी उत्कीर्ण लेख
c) सॉंची गुफा अभिलेख
d) भरहुत भितिचित्र

A✔✔✔

Q).02
चन्द्रगुप्त द्वितीय के काल में विद्या , कला व साहित्य का महान केन्द्र कौनसा था ?

a) धारवाड़
b) वाराणसी
c) उज्जैन
d) विदिशा

C✔✔✔

Q).03
चन्द्रगुप्त द्वितीय को ” विक्रमादित्य ” क्यों कहा गया ?

a) उसकी उज्जैन शासकों पर विजय के फलस्वरूप
b) उसकी विभिन्न विजयों के फलस्वरूप
c) धार्मिक गुरुओं के आर्दशों के फलस्वरूप
d) उपरोक्त्त में से कोई नहीं

A✔✔✔

Q).04
चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के दरबार में नवरत्नों में सबसे अधिक प्रसिद्ध था?

a) कालिदास
b) आर्य्भट्ट
c) धनवन्तरि
d) वराहमिहिर

A✔✔✔

Q).05
कालिदास की किस कृति की गिनती विश्व की सौ प्रसिद्ध साहित्यिक कृतियों में होती हैं ?

a) ऋतुसंहार
b) मेघदूतम्
c) अभिज्ञानशाकुन्तलम्
d) कुमारसम्भवम्

C✔✔✔

Q).06
भारत के किस स्थल की खुदाई से लौह धातु के प्रचालन के प्राचीनतम प्रमाण मिले हैं ?

a) तक्षशिला
b) अतरंजीखेड़ा
c) कौशम्बी
d) हस्तीनपुर

B✔✔✔✔

Q).07
कपिल मुनि द्वारा प्रतिपादित दार्शनिक प्रणाली है –

a) पूर्व-मीमांसा
b) संख्या-दर्शन
c) न्याय दर्शन
d) उत्तर-मीमांसा

B✔✔✔

image

Q).08
अध्यात्म ज्ञान के विषय में नचिकेता और यम का संवाद किस उपनिषद में प्राप्त होता है ?

a) वृहदारण्यक उपनिषद में
b) छंदोग्य उपनिषद में
c) कथोपनिषद में
d) केन उपनिषद में

C✔✔✔

Q).09
उपनिषद कल के राजा अश्वपति शासक थे –

a) काशी के
b) केकय के
c) पांचाल के
d) विदेह के

B✔✔✔

Q).10
आरंभिक वैदिक साहित्य में सर्वाधिक वर्णित नदी है –

a) सिन्धु
b) सतुद्री
c) सरस्वती
d) गंगा

A✔✔✔

Q).11
उपनिषद पुस्तकें हैं –

a) धर्म पर
b) योग पर
c) विधि पर
d) दर्शन पर

D✔✔✔

Q).12
योग दर्शन के प्रतिपादक हैं –

a) पतंजलि
b) गौतम
c) जैमिनी
d) शंकराचार्य

A✔✔✔

Q).13
न्यायदर्शन को प्रचारित किया था –

a) चार्वाक ने
b) गौतम ने
c) कपिल ने
d) जैमिनी ने

B✔✔✔

Q).14
किस काल में अछूत की अवधारणा स्पष्ट रूप से उदित हुयी ?

a) ऋग्वैदिक काल में
b) उत्तर वैदिक काल में
c) उत्तर गुप्त काल में
d) धर्मशास्त्र के काल में

D✔✔✔✔

Q).15
800 ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व का काल किस युग से जुड़ा है ?

a) ब्राम्ह्ण युग
b) सूत्र युग
c) रामायण युग
d) महाभारत युग

A✔✔✔

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रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद के बीच एक दुर्लभ संवाद

स्वामी विवेकानंद     :  मैं समय नहीं निकाल पाता. जीवन आप-धापी से भर गया है.

रामकृष्ण परमहंस   :  गतिविधियां तुम्हें घेरे रखती हैं. लेकिन उत्पादकता आजाद करती है.

स्वामी विवेकानंद     :  आज जीवन इतना जटिल क्यों हो गया है?   
     
रामकृष्ण परमहंस   :  जीवन का विश्लेषण करना बंद कर दो. यह इसे जटिल बना देता है. जीवन को सिर्फ जिओ.

स्वामी विवेकानंद     :  फिर हम हमेशा दुखी क्यों रहते हैं?   
   
रामकृष्ण परमहंस   :  परेशान होना तुम्हारी आदत बन गयी है. इसी वजह से तुम खुश नहीं रह पाते.

स्वामी विवेकानंद     :  अच्छे लोग हमेशा दुःख क्यों पाते हैं?

रामकृष्ण परमहंस   :  हीरा रगड़े जाने पर ही चमकता है. सोने को शुद्ध होने के लिए आग में तपना पड़ता है. अच्छे लोग दुःख नहीं पाते बल्कि परीक्षाओं से गुजरते हैं. इस अनुभव से उनका जीवन बेहतर होता है, बेकार नहीं होता.

स्वामी विवेकानंद     :  आपका मतलब है कि ऐसा अनुभव उपयोगी होता है?

रामकृष्ण परमहंस   :  हां. हर लिहाज से अनुभव एक कठोर शिक्षक की तरह है. पहले वह परीक्षा लेता है और फिर सीख देता है.

स्वामी विवेकानंद     :  समस्याओं से घिरे रहने के कारण, हम जान ही नहीं पाते कि किधर जा रहे हैं…

रामकृष्ण परमहंस   :  अगर तुम अपने बाहर झांकोगे तो जान नहीं पाओगे कि कहां जा रहे हो. अपने भीतर झांको. आखें दृष्टि देती हैं. हृदय राह दिखाता है.

स्वामी विवेकानंद     :  क्या असफलता सही राह पर चलने से ज्यादा कष्टकारी है?

रामकृष्ण परमहंस   :  सफलता वह पैमाना है जो दूसरे लोग तय करते हैं. संतुष्टि का पैमाना तुम खुद तय करते हो.

स्वामी विवेकानंद     :  कठिन समय में कोई अपना उत्साह कैसे बनाए रख सकता है?

रामकृष्ण परमहंस   :  हमेशा इस बात पर ध्यान दो कि तुम अब तक कितना चल पाए, बजाय इसके कि अभी और कितना चलना बाकी है. जो कुछ पाया है, हमेशा उसे गिनो; जो हासिल न हो सका उसे नहीं.

स्वामी विवेकानंद     :  लोगों की कौन सी बात आपको हैरान करती है?

रामकृष्ण परमहंस   :  जब भी वे कष्ट में होते हैं तो पूछते हैं, “मैं ही क्यों?” जब वे खुशियों में डूबे रहते हैं तो कभी नहीं सोचते, “मैं ही क्यों?”

स्वामी विवेकानंद     :  मैं अपने जीवन से सर्वोत्तम कैसे हासिल कर सकता हूँ?

रामकृष्ण परमहंस   :  बिना किसी अफ़सोस के अपने अतीत का सामना करो. पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने वर्तमान को संभालो. निडर होकर अपने भविष्य की तैयारी करो.

स्वामी विवेकानंद     :  एक आखिरी सवाल. कभी-कभी मुझे  लगता है कि मेरी प्रार्थनाएं बेकार जा रही हैं.

रामकृष्ण परमहंस   :  कोई भी प्रार्थना बेकार नहीं जाती. अपनी आस्था बनाए रखो और डर को परे रखो. जीवन एक रहस्य है जिसे तुम्हें खोजना है. यह कोई समस्या नहीं जिसे तुम्हें सुलझाना है. मेरा विश्वास करो- अगर तुम यह जान जाओ कि जीना कैसे है तो जीवन सचमुच बेहद आश्चर्यजनक हैl